20 June, 2008

LOST IN THE WORLD OF DR. BHAWNA

Designed and painted by Dr. Bhawna

26 comments:

राकेश जैन said...

sundar painting, Dr, Bhawna Ji kya aapke pas Birds kee paintings hain, main dekhna chaunga,

29.rakesh@gmail.com

Rajesh Roshan said...

पेंटिंग की बहुत समझ नही है लेकिन फ़िर भी अच्छी लगी सो टिप्पणी कर रहा हू. बधाई

Suresh Chandra Gupta said...

इतनी समझ तो नहीं आई पर फ़िर भी अच्छी लगी. आगे और पेंटिंग्स का इंतज़ार रहेगा.

Udan Tashtari said...

इस ब्लॉग की तो बेहतरीन सज्जा की गई है और उस पर से लाजबाब पेन्टिंग चार चांद लगा रही है, बहुत उम्दा. और लाईये पेन्टिंगस.

advocate rashmi saurana said...

sundar painting.badhai ho.

अरुण said...

बढिया जी बनाती रहे और हमे भी सिखाये की कैसे बनाये

DR.ANURAG said...

beautifulll...amazing...

हरि said...

creation is very difficult but review/comments r very simple. just think, create n GAYEEEE CHALAAA JAAAAAAAAA

संदीप शर्मा Sandeep sharma said...

दीपावली की हार्दिक मंगलकामनाएं...

Jimmy said...

Thats Great Owsam


visit my site

www.discobhangra.com

makrand said...

great art work too
regards

bahadur patel said...

bahut achchhi panting hai.badhai.

JHAROKHA said...

Respected Bhawanaji,
Meree kavita kee tareef ke liye thanks.Ap likhne ke sath hee paintings bhee bahut sunar banatee hain..Meree shubhkamnaen.
Poonam

ilesh said...

what a creativity....behad khubsurat...sundar bhavo ko sajaya he aapne rango ki kehfil se...regards

R. Ramesh said...

awesome, simply awesome..congrats

R. Ramesh said...

thanks for your Holi greetings friend, do stay connected

R. Ramesh said...

dropped in to check the next post, leaving by just saying Hiiiiiiii

अनुपम अग्रवाल said...

मनोहारी .

इसमेँ विवरण भी देँ तो शायद और अच्छा रहे

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

डॉ.भावना।
आपके नाम के अनुरूप ही आपके चित्र हैं।
कला, कल्पना और भावनाओं का संगम
मनमोहक बन पडा है।
बधाई।

अक्षर जब शब्द बनते हैं said...

बहुत बढ़िया भावना जी, मेरी बधाई स्वीकारें।अब आप के ब्लॉग पर आना-जाना लगा रहेगा।- सुशील कुमार। (sk.dumka@gmail.com)

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' said...

भावना को
कामना के रंग ले
आकार देकर
रच रही हो
सृष्टि नव तुम.
काबिले-तारीफ है यह.

ilesh said...

behtarin art....just beautiful...keep it up

"लोकेन्द्र" said...

हम थोड़े रंगों की भाषा समझने में कमजोर हैं....... लेकिन आपकी ये कृति पसंद आई..........

डॉ० डंडा लखनवी said...

अनेक खूबिया बहुत खूबियां हैं आपकी पेन्टिग में.......जितनी तारीफ की जाए कम है। होली की बधाई......इस अवसर पर प्रकृति भी उल्लास से सराबोर है.....उसका एक रूप इस रचना में देखिए....-डॉ० डंडा लखनवी !


नेचर का देखो फैशन शो

-डॉ० डंडा लखनवी

क्या फागुन की फगुनाई है।
हर तरफ प्रकृति बौराई है।।
संपूर्ण में सृष्टि मादकता -
हो रही फिरी सप्लाई है।।1

धरती पर नूतन वर्दी है।
ख़ामोश हो गई सर्दी है।।
भौरों की देखो खाट खाड़ी-
कलियों में गुण्डागर्दी है।।2

एनीमल करते ताक -झाक।
चल रहा वनों में कैटवाक।।
नेचर का देखो फैशन शो-
माडलिंग कर रहे हैं पिकाक।।3

मनहूसी मटियामेट लगे।
खच्चर भी अपटूडेट लगे।।
फागुन में काला कौआ भी-
सीनियर एडवोकेट लगे।।4

इस जेन्टिलमेन से आप मिलो।
एक ही टाँग पर जाता सो ।।
पहने रहता है धवल कोट-
ये बगुला या सी0एम0ओ0।।5

इस ऋतु में नित चैराहों पर।
पैंनाता सीघों को आकर।।
उसको मत कहिए साँड आप-
फागुन में वही पुलिस अफसर।।6

गालों में भरे गिलौरे हैं।
पड़ते इन पर ‘लव’ दौरे हैं।।
देखो तो इनका उभय रूप-
छिन में कवि, छिन में भौंरे हैं।।7

जय हो कविता कालिंदी की।
जय रंग-रंगीली बिंदी की।।
मेकॅप में वाह तितलियाँ भी-
लगतीं कवयित्री हिंदी की।8

वो साड़ी में थी हरी - हरी।
रसभरी रसों से भरी- भरी।।
नैनों से डाका डाल गई-
बंदूक दग गई धरी - धरी।।9

ये मौसम की अंगड़ाई है।
मक्खी तक बटरफलाई है ।।
धोषणा कर रहे गधे भी सुनो-
इंसान हमारा भाई है।।10

सचलभाष-0936069753

जयकृष्ण राय तुषार said...

aap ke mun me kavi ke saath ek sundar kalakar bhi hai bahut badhai

Hari Shanker Rarhi said...

Very nice painting! Congrats